Chandigarh कांग्रेसी नेता द्वारा नालागढ़ के 600 साल पुराने नरसिंह मंदिर की 41 बीघा जमीन का अवैध हस्तांतरण करके 125 करोड़ की टाउनशिप बनाने का मुद्दा सवालों के घेरे में! by Gurdeep Singh October 28, 2026 written by Gurdeep Singh October 28, 2026 2FacebookTwitterPinterestEmail हाई कोर्ट ने विकास गतिविधियों पर लगाया स्टे चण्डीगढ़ : हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ (बीबीएन) में स्थित ऐतिहासिक ठाकुरद्वारा श्री नरसिंह जी मंदिर के भूमि विवाद को लेकर चंडीगढ़ प्रेस क्लब में प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। मंदिर प्रबंधन के अनुसार, करीब छह सौ वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धार्मिक धरोहर की जमीन के हस्तांतरण, राजस्व रिकॉर्ड में कथित अनियमितताओं और आवासीय टाउनशिप विकसित करने के मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में जनहित याचिका संख्या 115/2026 दायर की गई थी। याचिका में उठाए गए सवालों और लगाए गए आरोपों को अदालत ने संवेदनशील मानते हुए तुरंत विकसित गतिविधियों पर स्टे आर्डर पारित किया। मंदिर प्रबंधन की ओर से मुख्य सेवादार रमेश चंद्र, समाजसेवी राजेश कुमार, और हाई कोर्ट की सीनियर एडवोकेट अंबिका कोटवाल के अनुसार वर्ष 1421 में राजा विक्रम चंद्र ने मंदिर निर्माण के लिए 1730 बीघा 12 बिस्वा भूमि दान की थी। वर्ष 1972 में हिमाचल प्रदेश सरकार ने रखरखाव के नाम पर इसमें से 1564 बीघा 13 बिस्वा भूमि अपने अधीन ले ली। प्रबंधन का कहना है कि इसके बाद मंदिर की ऐतिहासिक संपत्ति और धार्मिक गतिविधियों के संरक्षण का सवाल लगातार गंभीर होता गया। वर्ष 2017 में मंदिर की भूमि की वापसी और जीर्णोद्धार का आश्वासन देकर 41 बीघा 10 बिस्वा जमीन का अवैध हस्तांतरण कराया गया। इस मामले में स्थानीय विधायक राम कुमार चौधरी व कुछ अन्य व्यक्तियों की भूमिका पर गंभीर आरोप लगे हैं। प्रबंधन का दावा है कि भूमि पर लगाए गए हजारों पेड़ काट दिए गए, खनन किया गया और करीब 125 करोड़ रुपये से अधिक की आवासीय योजना के तहत प्लॉट आवंटन की प्रक्रिया तक शुरू कर दी गई। राजस्व इंतकाल पर सवाल मंदिर प्रबंधन के अनुसार, 24 जुलाई 2017 को नालागढ़ में पंजीकृत समझौते से संबंधित दस्तावेज की जांच में तबादला रजिस्ट्री संख्या 1240 सामने आई। इस पर आधारित इंतकाल संख्या 1413 को 16 अप्रैल 2018 को रद्द किए जाने का दावा किया गया। आरोप है कि निचली अदालत में स्वामित्व घोषणा का मुकदमा संख्या 60/2018 दायर करते समय इंतकाल संख्या और संपत्ति की प्रकृति से संबंधित तथ्यों को लेकर अनेक विसंगतियां प्रकाश में आई। मंदिर प्रबंधन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 26 अक्टूबर 2024 के निचली अदालत के फैसले तथा 28 अप्रैल 2025 के इंतकाल को चुनौती भी दी गई। सीनियर अधिवक्ता अंबिका कोटवाल ने बताया कि हाईकोर्ट ने मामले से संबंधित सभी गतिविधियों पर स्थगन आदेश जारी करते हुए राजस्व और न्यायिक रिकॉर्ड तलब किए हैं। मंदिर प्रबंधन ने बीबीएन के उद्योग जगत, व्यापारियों और आम जनता से अपनी ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण में सहयोग की अपील की है। दरअसल अब मामला केवल भूमि विवाद तक सीमित नहीं रहा बल्कि धार्मिक विरासत, राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता और औद्योगिक क्षेत्र में कानून के पालन से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए गए हैं। 0 comments 0 FacebookTwitterPinterestEmail Gurdeep Singh previous post ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचे प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, समस्याओं का लिया जायजाअधिकारियों को दिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश, बोले—मिलकर बनाएंगे आदर्श ट्रांसपोर्ट नगर next post चण्डीगढ़ नगर निगम को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए मैदान में उतरी आपकी आवाज पार्टी You may also like आईटीबीपी के पूर्व सैनिक फोर्स की अनदेखी से... October 28, 2026 सरहदी ग्लोबल फाउंडेशन की ओर से आयोजित निशुल्क... October 28, 2026 महर्षि वाल्मीकि जी का जीवन सत्य, तपस्या और... October 28, 2026 सीएचजेयू ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात... October 28, 2026 अग्र महिला शक्ति ने अमित जिंदल की टीम... October 28, 2026 चण्डीगढ़ नगर निगम को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के... October 28, 2026 ट्रांसपोर्ट नगर पहुंचे प्रशासक गुलाब चंद कटारिया, समस्याओं... October 28, 2026 महिला केंद्रित अधिनियम और सुरक्षा योजनाएँ शीर्षक से... October 28, 2026 चंडीगढ़ की डॉ. रितु नांगिया ने छठे भारतीय... October 28, 2026 भवन विद्यालय के वार्षिक मेगा फेट ‘एनचांटे ’26’... October 28, 2026 Leave a Comment Cancel Reply Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.