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चण्डीगढ़ में प्रॉपर्टी के हिस्सों की बिक्री पर लगी रोक हटाने की मांग को लेकर गृह मंत्री अमित शाह से हस्तक्षेप की अपील की

by Gurdeep Singh

वरिष्ठ नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित : करीब तीन साल नौ महीने से हजारों परिवारों की संपत्ति में फंसी पूंजी

चण्डीगढ़ : शहर में संयुक्त रूप से स्वामित्व वाली आवासीय संपत्तियों के शेयर की अलग-अलग बिक्री पर लगी रोक को समाप्त करने की मांग को लेकर प्रॉपर्टी शेयरहोल्डर्स वेलफेयर एसोसिएशन, चंडीगढ़ ने आवाज बुलंद की है। एसोसिएशन की ओर से शनिवार को सेक्टर-27 स्थित चंडीगढ़ प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस प्रतिबंध के कारण हजारों परिवारों को हो रही आर्थिक और सामाजिक परेशानियों को उजागर किया गया।

एसोसिएशन ने विशेष रूप से वरिष्ठ और अति वरिष्ठ नागरिकों की समस्याओं पर चिंता जताते हुए कहा कि 9 फरवरी 2023 से लागू प्रतिबंध के कारण लोगों की जीवनभर की कमाई उनकी अपनी संपत्तियों में फंसी हुई है। लगभग तीन साल नौ महीने बीत जाने के बावजूद लोग अपने कानूनी हिस्से का मूल्य प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। इसके चलते बच्चों की शिक्षा, विवाह, चिकित्सा खर्च, कर्ज की अदायगी और सेवानिवृत्ति से जुड़ी योजनाएं प्रभावित हो रही हैं।

एसोसिएशन की ओर से एडवोकेट खिंदरिया, ब्रिगेडियर प्रदीप शर्मा, हरपाल सिंह, भूपिंदर सिंह एवं पूजा भारत कपूर आदि ने प्रेस वार्ता को संबोधित किया।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि इस प्रतिबंध से सबसे अधिक प्रभावित वरिष्ठ नागरिक हैं, जिन्होंने अपनी जीवनभर की बचत संयुक्त संपत्तियों में निवेश की थी। जीवन के इस पड़ाव पर उन्हें चिकित्सा, देखभाल और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए धन की आवश्यकता है, लेकिन अपनी संपत्ति में कानूनी हिस्सेदारी होने के बावजूद वे उसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं।

एसोसिएशन ने संविधान के अनुच्छेद 41 का हवाला देते हुए कहा कि वृद्धावस्था में नागरिकों को सहायता उपलब्ध करवाना राज्य के नीति-निर्देशक सिद्धांतों का हिस्सा है।

एसोसिएशन के अनुसार, चंडीगढ़ में पिछले वर्षों के दौरान प्रॉपर्टी के लगभग 10 हजार शेयरों की बिक्री हो चुकी है। संगठन ने अनुमान जताया कि मौजूदा प्रतिबंधों के कारण स्टांप ड्यूटी से होने वाली संभावित राजस्व प्राप्ति पर सालाना लगभग 200 करोड़ रुपये और तीन साल नौ महीने की अवधि में करीब 750 करोड़ रुपये तक का संभावित प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि, एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े अनुमानित हैं और इनकी आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

एसोसिएशन ने 10 जनवरी 2023 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले की व्याख्या और उसके क्रियान्वयन के तरीके पर भी सवाल उठाए। संगठन का कहना है कि अपार्टमेंटलाइजेशन को रोकने का उद्देश्य संयुक्त मालिकों को उनकी अविभाजित हिस्सेदारी बेचने के कानूनी अधिकार से वंचित करने का आधार नहीं बनना चाहिए।

एसोसिएशन ने यह भी कहा कि मौजूदा नीति के कारण परिवारों के भीतर विवाद और मुकदमेबाजी बढ़ रही है। जो सह-मालिक संयुक्त संपत्ति से अपना हिस्सा अलग करना चाहते हैं, उनके सामने अदालतों का दरवाजा खटखटाने के अलावा सीमित विकल्प रह गए हैं। संगठन के अनुसार, चंडीगढ़ की वास्तुकला और नियोजित स्वरूप को भवन निर्माण योजनाओं की जांच एवं स्वीकृति के माध्यम से सुरक्षित रखा जा सकता है।

एसोसिएशन ने चंडीगढ़ प्रशासन, केंद्रीय गृह मंत्रालय और जनप्रतिनिधियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की। संगठन ने विशेष रूप से 1 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के चंडीगढ़ दौरे के मद्देनजर उनसे इस समस्या का संज्ञान लेकर शीघ्र समाधान करवाने की अपील की।

एसोसिएशन ने मांग की कि प्रॉपर्टी के हिस्सों की बिक्री के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनी रूप से टिकाऊ व्यवस्था बनाई जाए तथा वरिष्ठ एवं अति वरिष्ठ नागरिकों के मामलों को प्राथमिकता दी जाए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में एसोसिएशन ने कहा कि संपत्ति का कानूनी मालिक होने के बावजूद यदि कोई नागरिक अपनी जरूरत के समय उसकी कीमत प्राप्त नहीं कर सकता, तो यह उसके आर्थिक अधिकारों और सम्मान से जुड़ा गंभीर सवाल है। संगठन ने प्रशासन से इस मामले में जल्द निर्णय लेने की अपील की।

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