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प्रभु श्री राम कथा सुनना और सुनाना पूर्व निश्चित होता है और ये अवसर सौभाग्य से ही प्राप्त होता है : आचार्य पंडित ईश्वर चंद्र शास्त्री जी

by Gurdeep Singh

भगवान परशुराम भवन सैक्टर 37 सी चंडीगढ़ में चल रहे पांच दिवसीय प्रभु श्री राम कथा के तीसरे दिन आचार्य पंडित ईश्वर चंद्र शास्त्री जी ने भगवान राम चंद्र जी के प्रकटोत्सव उपरांत उनकी बाल लीला का प्रसंग बड़े मधुर सरस और मनभावन शैली में वर्णित किया। श्री ब्राह्मण सभा, चण्डीगढ़ के अध्यक्ष और अखिल भारत ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय महासचिव यशपाल तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि आज कथा वाचक ने कथा करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसी दास जी ने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम जी के पावन चरित्र को काव्य रस द्वारा श्री राम चरित मानस में चौपाइयों, सोरठो, दोहों और श्लोकों के माध्यम से अद्भुत मृदु मंजुल भाषा में लिपिबद्ध किया है।
आचार्य जी ने कहा कि प्रभु श्री राम कथा सुनना और सुनाना पूर्व निश्चित होता है और सौभाग्य से ही प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि श्री राम चरित मानस भारतीय संस्कृति की वह अमूल्य धरोहर है जो प्रत्येक युग में मानव जीवन को उचित दिशा प्रदान करता है। आचार्य श्री ने बताया कि भगवान श्री राम ने जीवन की विषम परिस्थितियों में भी धर्म, मर्यादा और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। कथा में संगीतमय भजन एवं श्री राम के जयघोष से पूरा वातावरण गूंज उठा। श्री राम कथा के आयोजक श्री ब्राह्मण सभा चण्डीगढ़ के अध्यक्ष यशपाल तिवारी ने बताया कि चंडीगढ़ के पूर्व महापौर एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अरुण सूद भी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। उनके साथ स्थानीय पार्षद उमेश घई भी पधारे।

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