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जब-जब पृथ्वी पर अधर्म और गौ-विरोधी शक्तियां बढ़ी हैं, तब-तब संतों ने शस्त्र और शास्त्र दोनों उठाए हैं : श्री गोपाल मणि

by Gurdeep Singh

 श्री गोपाल गोलोक धाम, कैम्बवाला, चण्डीगढ़ में पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) के पावन अवसर पर आयोजित सात दिवसीय ‘धेनुमानस गौ कथा’ के अंतर्गत आज कथा व्यास, गो-गंगा कृपाकांक्षी पूज्य श्री गोपाल मणि जी महाराज ने श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि ‘धेनु मानस’ ग्रंथ में भगवान परशुराम और गौ माता के प्रसंग को बहुत ही दिव्य और अनूठे दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया गया है।
धेनु मानस कथा के दौरान भगवान परशुराम जी के चरित्र के मुख्य प्रसंग सुनाते हुए महाराज जी ने बताया कि परशुराम जी की भगवान शिव के प्रति अटूट और अद्वितीय निष्ठा थी। वे स्वयं ब्राह्मण कुल में जन्मे थे, लेकिन उनका शौर्य और पराक्रम सदा धर्म की रक्षा के लिए समर्पित रहा।
पूज्य महाराज जी ने समझाया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म, अनीति और गौ-विरोधी शक्तियां बढ़ी हैं, तब-तब संतों और वीरों ने शस्त्र और शास्त्र दोनों को उठाया है। उन्होंने परशुराम जी की कठिन तपस्या और उनके क्रोध को धर्म की स्थापना से जोड़ते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन और उपासना भगवान शिव को समर्पित थी। कथा के माध्यम से यह दिव्य संदेश दिया गया  महाराज जी के इन दिव्य विचारों से उपस्थित श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए।
कथा के दौरान आचार्य सीताशरण महाराज ने अपनी सुमधुर आवाज में भजनों के माध्यम से गौकथा की महिमा का सुंदर गुणगान किया। वहीं, व्यास गौरांग शरण मणि जी ने भक्त प्रह्लाद की कथा के प्रेरक प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इस पावन अवसर पर दिव्य गौकथा का रसपान करने के लिए बड़ी संख्या में गौभक्त गौशाला पहुंचे।
कल (शनिवार) कथा के विश्राम (समापन) के अवसर पर सुबह 8:00 बजे हवन-यज्ञ, सुबह 9:00 बजे से अंतिम दिन की कथा और उसके उपरांत विशाल भंडारे में प्रसाद वितरित किया जाएगा।

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