ChandigarhLatest हर साँस श्री नंगली वाले के नाम : चंडीगढ़ में श्रद्धा व उल्लास के साथ संपन्न हुआ 10वां आध्यात्मिक संत सम्मेलन by Gurdeep Singh October 5, 2026 written by Gurdeep Singh October 5, 2026 5FacebookTwitterPinterestEmail नंगली दरबार सेवा समिति, चंडीगढ़ द्वारा इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 स्थित श्री शिव मानस मंदिर में “हर स्वांस श्री नंगली वाले के नाम” 10वें आध्यात्मिक संत सम्मेलन एवं भजन संध्या का अत्यंत गरिमामयी और श्रद्धा भाव से आयोजन किया गया। इस पावन कार्यक्रम की अध्यक्षता आर्चनीय वंदनीय पूज्य श्री सन्त गुरुसेवा नन्द पुरी महाराज जी ने की। समारोह का शुभारंभ प्रधान सेवक श्री देश राज राणा जी की अगुवाई में सेक्टर-31 लाइट पॉइंट से निकाली गई भव्य एवं पावन रथ यात्रा से हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालु भाव-विभोर होकर सम्मिलित हुए। रथ यात्रा के मंदिर प्रांगण पहुँचने के उपरांत श्री गुरुदेव भगवान जी की पावन मंगल आरती, सत्संग एवं संकीर्तन का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में मंच संचालन लुधियाना से पधारे श्री गुरु महाराज जी के अनन्य भक्त श्री ओम प्रकाश छाबड़ा जी ने कुशलतापूर्वक किया, जिसमें उन्होंने श्री परमहंस दयाल जी के दिव्य जीवन चरित्र और लीलाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला।इस दिव्य आध्यात्मिक महाकुंभ में दरबार-ए श्री नंगली से लगभग 50 से 60 प्रमुख संत-महापुरुषों का पावन पदार्पण हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। समागम में पूज्यनीय संत श्री धर्म प्रेमानंद जी (पानीपत), संत धर्म प्रकाशानंद जी (अंबाला), स्वामी रोशनानंद जी, स्वामी अभेद्य योगानंद जी, स्वामी प्रेम धर्मानंद जी, संत दर्शनानन्दपुरी जी, संत सार शरणानंद जी (कैथल), स्वामी प्रेम शरणानंद जी, महात्मा अजून ज्ञानानन्द जी, महात्मा श्यामानन्द जी, महात्मा संतोष बृजानन्द जी, महात्मा संतोष शिवानंद जी, संत सेवानंद जी (पंचकूला), स्वामी महिमानंद पुरी जी, संत भगवान प्रकाशानंद जी, संत महिमानंद पुरी जी, स्वामी विज्ञान प्रेमानंद जी (फतेहाबाद), स्वामी ज्ञान प्रेमानंद जी, स्वामी माधवानंद जी तथा सन्त आधार शब्दानंद महाराज जी सहित अनेक संतों ने अपनी पावन उपस्थिति से संगत को निहाल किया।संत सम्मेलन को संबोधित करते हुए पूज्यनीय संत श्री धर्म प्रेमानंद जी ने कहा कि अशांत मन को वश में करने और जीवन में वास्तविक शांति पाने के लिए “सिमरन” परम आवश्यक है, क्योंकि सिमरन से ही चित्त स्थिर और शांत होता है। वहीं, पूज्य स्वामी अभेद्य योगानंद महाराज जी ने गुरु महिमा और गुरु शब्द की महत्ता स्पष्ट करते हुए सावधान किया कि गुरु निंदा सबसे बड़ा पाप है और सच्चे मन से की गई गुरु भक्ति ही मनुष्य को भव-बंधन व आवागमन के चक्र से मुक्त कर सकती है। इसके पश्चात संत धर्म प्रकाशानंद जी ने अपने सुमधुर भजनों से ऐसा समां बांधा कि समूची संगत भक्ति रस में झूम उठी। संत सार शरणानंद जी एवं स्वामी विज्ञान प्रेमानंद जी ने भी श्री नंगली निवासी भगवान जी की प्रेरक जीवन लीलाओं का सजीव वर्णन कर सभी को सन्मार्ग पर चलने का संदेश दिया।समारोह के समापन पर समिति के प्रधान सेवक श्री देश राज राणा जी ने दूर-दराज से पधारे सभी पूज्य संत-महापुरुषों, सेवादारों और श्रद्धालु भक्तों का हृदय की गहराइयों से आभार व्यक्त करते हुए साधुवाद दिया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित समस्त संगत के लिए श्री गुरु महाराज जी का अटूट लंगर श्रद्धापूर्वक बरताया गया। 0 comments 0 FacebookTwitterPinterestEmail Gurdeep Singh previous post आया रे खिलौने वाला खिलौने लेकर आया रे… next post स्वर्गीय मलकीत सिंह बुटेरला की याद में रक्तदान शिविर लगाया You may also like ਏਸ਼ੀਆਈ ਖੇਡਾਂ ‘ਚ ਭਾਰਤੀ ਮਹਿਲਾ ਹਾਕੀ ਟੀਮ ਨੇ... October 5, 2026 ਏਸ਼ੀਆਈ ਖੇਡਾਂ ‘ਚ ਭਾਰਤ ਦਾ ਤਿਰੰਗਾ ਇੱਕ ਵਾਰ... October 5, 2026 ਅੱਜ ਮਹਾਰਾਜਾ ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ ਅਕੈਡਮੀ, ਫਿਲੌਰ ਵਿਖੇ ਪੰਜਾਬ... October 5, 2026 ਏਸ਼ੀਆਈ ਖੇਡਾਂ ‘ਚ ਭਾਰਤੀ ਪੁਰਸ਼ ਹਾਕੀ ਟੀਮ ਨੇ... October 5, 2026 ਅੱਜ ਪੰਜਾਬ ਕਲਾ ਪ੍ਰੀਸ਼ਦ, ਚੰਡੀਗੜ੍ਹ ਵੱਲੋਂ ਕਰਵਾਏ ਗਏ... October 5, 2026 ਬੱਚਿਆਂ ਦੇ ਭਵਿੱਖ ਨੂੰ ਰੋਸ਼ਨ ਕਰਨ ਅਤੇ ਬਿਹਤਰ... October 5, 2026 ਪਹਿਲੇ ਪਾਤਸ਼ਾਹ ਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਨਾਨਕ ਦੇਵ ਜੀ ਦੇ... October 5, 2026 ਸ੍ਰੀ ਆਨੰਦਪੁਰ ਸਾਹਿਬ ਦੇ ਪਿੰਡ ਜਿੰਦਵੜੀ ਵਿਖੇ ਲੋਕਾਂ... October 5, 2026 हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी नई दिल्ली... October 5, 2026 हवन-यज्ञ और कृष्ण-सुदामा प्रसंग के साथ श्रीमद्भागवत कथा... October 5, 2026 Leave a Comment Cancel Reply Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.