Chandigarh चण्डीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के सहयोग से संवाद थिएटर ग्रुप ने प्रस्तुत की राम वनवास से चित्रकूट की धर्मसभा तक की भावपूर्ण रामलीला by Gurdeep Singh October 16, 2026 written by Gurdeep Singh October 16, 2026 1FacebookTwitterPinterestEmail राम-भरत के त्याग, प्रेम और धर्म के संवाद ने दर्शकों को किया भावुक, नम हुईं कई आंखें चण्डीगढ़ : चण्डीगढ़ संगीत नाटक अकादमी (सीएसएनए) के सहयोग से संस्कार भारती, पंजाब प्रांत एवं संवाद थिएटर ग्रुप द्वारा गढ़वाल रामलीला एवं दशहरा मंडल, सेक्टर 28-बी, चंडीगढ़ के मंच पर एक दिवसीय श्रीरामलीला का भावपूर्ण मंचन किया गया। लगभग ढाई घंटे की इस प्रस्तुति में श्रीराम के वनवास से लेकर चित्रकूट की ऐतिहासिक धर्मसभा तक की कथा को कलाकारों ने प्रभावशाली अभिनय, सशक्त संवादों और संवेदनशील मंचन के माध्यम से जीवंत कर दिया। भाईचारे, त्याग, कर्तव्य, पारिवारिक मूल्यों और धर्म की मर्यादा का ऐसा भावपूर्ण चित्रण हुआ कि दर्शक भावविभोर हो उठे और कई लोगों की आंखें नम हो गईं। प्रस्तुति में दिखाया गया कि किस प्रकार मंथरा के बहकावे में आकर कैकेयी राजा दशरथ से अपने दो वरदान मांगती हैं। एक वरदान के तहत श्रीराम के लिए 14 वर्षों का वनवास और दूसरे के तहत भरत के लिए अयोध्या का राज मांग लिया जाता है। पिता की आज्ञा और रघुकुल की मर्यादा का पालन करते हुए प्रभु श्रीराम सहर्ष वन जाने का निर्णय लेते हैं। उनके साथ माता सीता और लक्ष्मण भी वन की ओर प्रस्थान करते हैं। इस प्रसंग में श्रीराम का धैर्य, सीता का समर्पण, लक्ष्मण की भ्रातृभक्ति और राजा दशरथ की पुत्र-वियोग से उपजी पीड़ा को कलाकारों ने अत्यंत मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया। इसके बाद भरत के अयोध्या लौटने और समस्त घटनाक्रम की जानकारी मिलने का दृश्य दर्शकों के लिए विशेष रूप से भावुक करने वाला रहा। भरत अपनी माता कैकेयी के निर्णय का विरोध करते हुए राजसिंहासन स्वीकार करने से इनकार कर देते हैं और प्रभु श्रीराम को वापस अयोध्या लाने के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं। नाटक का सबसे प्रभावशाली और विचारोत्तेजक प्रसंग चित्रकूट की धर्मसभा रहा, जहां श्रीराम और भरत के बीच राज्य के अधिकार और कर्तव्य को लेकर संवाद होता है। श्रीराम चाहते हैं कि भरत अयोध्या का राज संभालें, जबकि भरत का आग्रह होता है कि श्रीराम ही अयोध्या के वास्तविक राजा हैं और उन्हें लौटकर राज्य की जिम्मेदारी संभालनी चाहिए। दोनों भाइयों के तर्कों में सत्ता की लालसा नहीं, बल्कि कर्तव्य, त्याग और एक-दूसरे के प्रति अगाध प्रेम दिखाई देता है। धर्मसभा में ऋषिराज जनक निर्णायक की भूमिका में उपस्थित होते हैं। सभी पक्षों को सुनने के बाद वे श्रीराम के वनवास में रहकर पिता की आज्ञा का पालन करने के पक्ष में निर्णय देते हैं। अंततः भरत प्रभु श्रीराम की चरण-पादुकाएं लेकर अयोध्या लौटने का निर्णय लेते हैं। यह दृश्य भारतीय संस्कृति में भ्रातृप्रेम, त्याग और धर्मपालन की महान परंपरा का सशक्त संदेश देता है। कलाकारों के अभिनय ने बांधा समां प्रस्तुति में श्रीराम की भूमिका कृष्ण भट्ट, लक्ष्मण की भूमिका नीरज, माता सीता की भूमिका हिमांशी राजपूत, राजा दशरथ की भूमिका वरिंदर पराशर, ऋषिराज जनक की भूमिका हंसराज पराशर, कैकेयी की भूमिका सोनाक्षी शर्मा, मंथरा की भूमिका सिमरन, उर्मिला की भूमिका अंकित पराशर, महर्षि वशिष्ठ की भूमिका कमल गुप्ता, विश्वामित्र की भूमिका सुनील सिंह तथा केवट की भूमिका अभिषेक ने निभाई। सभी कलाकारों ने अपने पात्रों के अनुरूप भावपूर्ण अभिनय और संवाद अदायगी से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। प्रस्तुति को प्रभावशाली बनाने के लिए प्रोफेशनल लाइटिंग, साउंड और एलईडी वॉल का उपयोग किया गया। प्रकाश व्यवस्था की डिजाइनिंग एवं संचालन राजेश कुमार ने किया। आधुनिक तकनीकी संसाधनों और सटीक प्रकाश संयोजन ने दृश्यों के भावनात्मक प्रभाव को और अधिक सशक्त बनाया। विशेष रूप से श्रीराम और भरत के बीच चित्रकूट की धर्मसभा के संवादों ने दर्शकों को गहराई तक प्रभावित किया। कलाकारों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति और प्रसंगों की संवेदनशील प्रस्तुति के कारण पूरा वातावरण भक्तिमय और भावुक हो गया। दर्शकों ने तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और प्रस्तुति की सराहना की। इस रामलीला का निर्देशन रजनी बजाज और अरविंद शर्मा ने किया, जबकि मुख्य निर्देशक मुकेश शर्मा रहे। निर्देशन में पात्रों की भावनाओं, संवादों की प्रभावशीलता और दृश्यों की नाटकीयता पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे राम-भरत मिलन और चित्रकूट की धर्मसभा जैसे प्रसंग दर्शकों के हृदय तक पहुंचे। संवाद थिएटर ग्रुप की इस प्रस्तुति ने संदेश दिया कि सच्चा धर्म केवल अधिकार प्राप्त करने में नहीं, बल्कि अपने कर्तव्य का पालन करने, त्याग की भावना रखने और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करने में है। श्रीराम और भरत के आदर्श आज भी समाज को मर्यादा, पारिवारिक एकता, निस्वार्थ प्रेम और नैतिक मूल्यों के साथ जीवन जीने की प्रेरणा देते हैं। 0 comments 0 FacebookTwitterPinterestEmail Gurdeep Singh previous post कर्मचारियों के रुके वेतन का मामला गरमाया, अरविंद सिंह की पहल पर संजय टंडन ने चीफ इंजीनियर से की बातचण्डीगढ़ : जीएमसीएच-32 के इंजीनियरिंग विभाग, फायर एवं गैस प्लांट के कर्मचारियों के सितंबर माह के रुके वेतन का मामला अब गंभीरता से उठाया गया है। ज्वाइंट एक्शन कमेटी के प्रधान सुखबीर सिंह द्वारा मुद्दा उठाने के बाद अरविंद सिंह ने कर्मचारियों की समस्या को भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्री संजय टंडन के संज्ञान में पहुंचाया। next post त्योहारी सीजन से पहले चण्डीगढ़ व्यापार मंडल ने ट्रैफिक एवं कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे चंडीगढ़ पुलिस के समक्ष उठाए You may also like भारत विकास परिषद ने अयोजित की प्रांतीय समूह... 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