Home » मानसिक स्वास्थ्य में एआई की भूमिका पर 51वें राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

मानसिक स्वास्थ्य में एआई की भूमिका पर 51वें राष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन

by Bhumi

राज्यपाल कविंदर गुप्ता ने आज ग्रेटर नोएडा स्थित गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में आयोजित क्लिनिकल साइकोलॉजी के 51वें राष्ट्रीय सम्मेलन (NACIACP-2026) का उद्घाटन किया। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर राणा पी. सिंह की अध्यक्षता में आयोजित हुआ, जिसका मुख्य विषय “मानसिक स्वास्थ्य में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका” रहा।

सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और व्यक्तिगत बनाने की क्षमता रखती है, जिससे जरूरतमंद व्यक्तियों को समय पर सहायता और उपचार मिल सकता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में एआई के उपयोग से रोगों की पहचान और उपचार की प्रक्रिया तेज, सटीक और अधिक प्रभावी हुई है।

श्री गुप्ता ने कहा कि आधुनिक समाज में तनाव, अवसाद, चिंता और अन्य मानसिक विकार तेजी से बढ़ रहे हैं, जो समाज के सभी वर्गों को प्रभावित कर रहे हैं। ऐसे में एआई स्वास्थ्य क्षेत्र में आशा और नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। उन्होंने बताया कि कई डिजिटल प्लेटफॉर्म और एप्लिकेशन विकसित किए जा चुके हैं, जो व्यक्ति की भावनाओं, व्यवहार और भाषा के पैटर्न का विश्लेषण कर प्रारंभिक अवस्था में ही मानसिक समस्याओं की पहचान कर सकते हैं, और भविष्य में ये तकनीकें और अधिक प्रभावी होंगी।

राज्यपाल ने कहा कि केंद्र सरकार ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की हैं। उन्होंने टेली-मानस जैसी योजनाओं का उल्लेख किया, जो देश के दूरदराज़ और वंचित क्षेत्रों तक मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य केवल एक चिकित्सकीय विषय नहीं, बल्कि सामाजिक संवेदनशीलता और सामूहिक जिम्मेदारी का भी विषय है।

श्री गुप्ता ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मौजूदा स्वास्थ्य योजनाओं के साथ बेहतर ढंग से एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि प्रत्येक व्यक्ति को समय पर सहायता मिल सके। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करने के लिए व्यापक जागरूकता अभियानों की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने कहा कि एआई आधारित तकनीकें विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जागरूकता फैलाने और सहायता प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं, जहां मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की कमी है।

उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग न्यूरोफीडबैक, ब्रेन इमेजिंग और डेटा विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में भी किया जा रहा है, जिससे मानसिक विकारों को बेहतर ढंग से समझने और नए उपचार विकल्प विकसित करने में मदद मिल रही है। हालांकि, कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक सहायक उपकरण है और यह मानवीय संवेदनशीलता, सहानुभूति और व्यक्तिगत स्पर्श का पूर्ण विकल्प नहीं हो सकती, जो मानसिक स्वास्थ्य देखभाल में अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने एआई आधारित समाधानों को अपनाते समय डेटा गोपनीयता, नैतिकता और सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

राज्यपाल ने कहा कि यदि एआई का उपयोग सही दिशा में और मानवीय मूल्यों के मार्गदर्शन में किया जाए, तो यह मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सशक्त, सुलभ और प्रभावी बनाने में परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।

इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर राणा पी. सिंह ने सम्मेलन की प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसके उच्च शैक्षणिक स्तर को रेखांकित किया।

इससे पहले सम्मेलन के संयोजक एवं मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष डॉ. आनंद पी. सिंह ने राज्यपाल का स्वागत किया।

कार्यक्रम के दौरान प्रोफेसर माधव गोविंद, प्रोफेसर गौरी शंकर कलोइया, प्रोफेसर आशा श्रीवास्तव, डॉ. निशि मिश्रा और डॉ. आलोक मिश्रा ने भी अपने विचार साझा किए।

इंडियन एसोसिएशन ऑफ क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट्स के पूर्व अध्यक्ष एवं संस्थापक सदस्य डॉ. मनोरंजन सहाय ने सम्मेलन के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।

राज्यपाल ने इस अवसर पर सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित भी किया।

You may also like

Leave a Comment