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डॉ. अंजना गर्ग को मिला प्रतिष्ठित ‘अग्ररत्न सम्मान’

by Gurdeep Singh

महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक के लोक प्रशासन विभाग की पूर्व प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. अंजना गर्ग को उनके दीर्घकालीन शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान के लिए प्रतिष्ठित ‘अग्ररत्न सम्मान’ से सम्मानित किया गया। महाराजा अग्रसेन विकास ट्रस्ट, महाराजा अग्रसेन सेवा सदन ट्रस्ट तथा महारानी माधवी रामायणी ट्रस्ट, रोहतक की ओर से प्रदान किया जाने वाला यह सम्मान संस्थाओं के सर्वोच्च सम्मानों में शामिल है। इस वर्ष यह सम्मान एक महिला और एक पुरुष को प्रदान किया गया।

डॉ. अंजना गर्ग ने विश्वविद्यालय में अध्यापन, शोध निर्देशन एवं शैक्षणिक गतिविधियों के माध्यम से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। वे हरियाणा अध्ययन केंद्र की पूर्व निदेशक रह चुकी हैं तथा भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय के बोर्ड की सदस्य के रूप में भी सेवाएँ दे चुकी हैं।

उनकी शैक्षणिक एवं साहित्यिक गतिविधियाँ देश तक सीमित नहीं रही हैं। उन्होंने स्पेन, अमेरिका, भूटान, आयरलैंड, फ्रांस, दुबई और स्कॉटलैंड सहित अनेक देशों की यात्राएँ की हैं। इन यात्राओं के दौरान उन्होंने शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेने के साथ-साथ साहित्यिक चर्चाओं और विचार-विमर्श के माध्यम से साहित्य एवं संस्कृति से जुड़े विषयों को भी साझा किया।

साहित्य-सृजन के क्षेत्र में डॉ. गर्ग की विशेष पहचान है। उनकी कहानियाँ, लघुकथाएँ और लघुकविताएँ विभिन्न समाचार-पत्रों एवं साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदना, सामाजिक जागरूकता, नारी सशक्तीकरण और जीवन-मूल्यों को प्रमुखता मिलती है। उन्हें साहित्य के क्षेत्र में भारतेंदु पुरस्कार सहित लघुकथा, लघुकविता एवं कहानी लेखन के लिए अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा जा चुका है।

डॉ. गर्ग साहित्य-सृजन के साथ सामाजिक सरोकारों में भी सक्रिय हैं। वे महिलाओं एवं युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने, सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और जरूरतमंद लोगों की समस्याओं के समाधान में सहयोग करती रही हैं। ‘अग्ररत्न सम्मान’ उनके बहुआयामी योगदान के प्रति सम्मान और मान्यता का प्रतीक है।

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