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पुटा की मतदाता सूची में रीजनल सेंटरों के शिक्षकों को शामिल नहीं किए जाने पर लोकतांत्रिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल

by Gurdeep Singh

डॉ. कुलविंदर सिंह ने श्री मुक्तसर साहिब, लुधियाना और होशियारपुर के रीजनल सेंटरों के पात्र शिक्षकों को तत्काल मतदाता सूची में शामिल करने की मांग की

चण्डीगढ़ : पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के वर्ष 2026–27 के चुनावों के लिए जारी प्रारंभिक मतदाता सूची में पंजाब यूनिवर्सिटी के श्री मुक्तसर साहिब, लुधियाना और होशियारपुर स्थित रीजनल सेंटरों के शिक्षकों को शामिल नहीं किए जाने से लोकतांत्रिक भागीदारी, समानता और संवैधानिक अधिकारों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पंजाब यूनिवर्सिटी के यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल (यूबीएस) में सहायक प्रोफेसर और टीचर्स वॉयस यूनाइटेड फ्रंट (टीवीयूएफ) के सदस्य डॉ. कुलविंदर सिंह ने इस संबंध में पुटा के अध्यक्ष और सचिव के समक्ष औपचारिक आपत्ति दर्ज कराते हुए तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की है।
पुटा के संविधान की धाराओं 2, 4 और 17(2) का हवाला देते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि संविधान में रीजनल सेंटरों के शिक्षकों को सदस्यता के दायरे में मान्यता दी गई है। इसके अतिरिक्त, एसोसिएशन की शाखाओं के सदस्यों को अन्य सदस्यों के समान अधिकार, दायित्व और विशेषाधिकार प्रदान किए गए हैं।
डॉ. सिंह ने बताया कि वह वर्ष 2024, 2025 और 2026 में आयोजित पुटा की जनरल बॉडी बैठकों तथा अन्य सार्वजनिक मंचों पर रीजनल सेंटरों के शिक्षकों को पुटा की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में शामिल करने का मुद्दा लगातार उठाते आ रहे हैं। इसके बावजूद पिछले तीन वर्षों से यह महत्वपूर्ण मामला अनसुलझा पड़ा है।

उन्होंने मांग की कि रीजनल सेंटरों के सभी पात्र शिक्षकों को सदस्यता संबंधी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने का उचित अवसर दिया जाए और उन्हें अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाए। इसके साथ ही संविधान के अनुसार पुटा के चुनाव लड़ने की उनकी पात्रता तथा कार्यकारिणी में उचित प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों का भी समाधान किया जाए।
डॉ. सिंह ने कहा कि श्री मुक्तसर साहिब, लुधियाना या होशियारपुर में सेवाएं देने वाले शिक्षक भी पंजाब यूनिवर्सिटी का उतना ही अभिन्न हिस्सा हैं, जितना चंडीगढ़ परिसर में काम करने वाले शिक्षक। किसी शिक्षक की तैनाती का स्थान उसके लोकतांत्रिक अधिकारों का आधार नहीं बनना चाहिए।
उन्होंने पुटा नेतृत्व से अपील की कि यदि समान भागीदारी और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए संवैधानिक संशोधन या संगठनात्मक पुनर्गठन की आवश्यकता है, तो जल्द से जल्द जनरल बॉडी की बैठक बुलाकर इस मुद्दे का लोकतांत्रिक तरीके से समाधान किया जाए।
डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि पुटा को केवल चंडीगढ़ परिसर के शिक्षकों का ही नहीं, बल्कि पंजाब यूनिवर्सिटी के सभी परिसरों और रीजनल सेंटरों में सेवाएं दे रहे संपूर्ण शिक्षक समुदाय का प्रतिनिधित्व करना चाहिए।

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