Home » ईएसआई ने श्राद्ध पक्ष में स्मृति वन में आयोजित किया पौधारोपण कार्यक्रम : प्रियजनों की स्मृति में पौधारोपण कर भावुक हुए लोग

ईएसआई ने श्राद्ध पक्ष में स्मृति वन में आयोजित किया पौधारोपण कार्यक्रम : प्रियजनों की स्मृति में पौधारोपण कर भावुक हुए लोग

by Gurdeep Singh

दिवंगत प्रियजनों की स्मृतियों को सदा जीवंत बनाए रखने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से द एनवायरनमेंट सोसायटी ऑफ इंडिया (ईएसआई), चंडीगढ़ ने वन एवं वन्यजीव विभाग, यूटी चंडीगढ़ के सहयोग से पवित्र श्राद्ध पक्ष के दौरान स्मृति वन में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। कार्यक्रम में करीब 20 सदस्यों और नागरिकों ने अपने माता-पिता, जीवनसाथी, रिश्तेदारों और अन्य प्रियजनों की स्मृति में पौधे लगाए। इस दौरान कई प्रतिभागी भावुक हो गए और उन्होंने अपने दिवंगत परिजनों की यादों को प्रकृति से जोड़ते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण उस समय देखने को मिला, जब 87 वर्षीय एक महिला, स्वर्गीय कर्नल एस. पी. शर्मा की धर्मपत्नी एवं सेक्टर-34, चंडीगढ़ की निवासी, ने अपने दिवंगत प्रियजनों की स्मृति में पौधा लगाया। इस दौरान वह भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सकीं और उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। करीब 80 वर्षीय बलजिंदर कौर सहित अन्य प्रतिभागियों ने भी पौधे लगाकर अपने प्रियजनों के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त की।
ईएसआई के सचिव एन. के. झिंगन ने कहा कि किसी दिवंगत प्रियजन की स्मृति में पौधा लगाना उनकी यादों और विरासत को जीवित रखने का एक सार्थक माध्यम है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन भले ही अस्थायी हो, लेकिन एक वृक्ष दशकों तक लोगों और अन्य जीवों को छाया, आश्रय, ऑक्सीजन और जीवन के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान कर सकता है। इस प्रकार पौधारोपण के माध्यम से व्यक्तिगत स्मृतियों को पर्यावरण और समाज के लिए स्थायी योगदान में बदला जा सकता है।
झिंगन ने अपने माता-पिता, पूर्वजों और उन रिश्तेदारों की स्मृति में भी पौधे लगाए, जिन्होंने पंजाब में आतंकवाद के दौर में अपनी जान गंवाई थी। उन्होंने कहा कि यह पहल उनके लिए व्यक्तिगत और भावनात्मक महत्व रखती है। इसके माध्यम से उन्होंने अपने परिवार के दिवंगत सदस्यों के साथ-साथ हिंसा में जान गंवाने वाले निर्दोष लोगों को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि ऐसे पौधे स्मरण, शांति, साहस और सद्भाव के प्रतीक हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को हिंसा और घृणा से मुक्त समाज बनाने की प्रेरणा देते हैं।
इस अवसर पर राजेश वशिष्ठ, अनुराधा वशिष्ठ, शशि झिंगन, अंजलि कपूर, आर. के. शर्मा, अशोक बंसल, श्री एवं श्रीमती कपानी, अशोक कुमार कालिया एवं उनकी धर्मपत्नी, विजय कुमारी, डी. वी. बांगिया, सीता कक्कड़, अंजू महाजन और परमजीत कौर सहित अन्य सदस्यों एवं शुभचिंतकों ने भाग लिया। झिंगन ने सोसायटी के अध्यक्ष डॉ. आर. सी. मिश्रा, इंजीनियर हेम राज सतीजा और डॉ. रविंदर नाथ की ओर से भी उनके दिवंगत प्रियजनों एवं पूर्वजों की स्मृति में पौधे लगाए, क्योंकि वे व्यक्तिगत कारणों से कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके थे।
झिंगन ने कहा कि किसी दिवंगत आत्मा की स्मृति में लगाया गया प्रत्येक वृक्ष एक जीवंत प्रार्थना, कृतज्ञता का प्रतीक और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का संदेश है। उन्होंने कहा कि पौधा लगाना पहला कदम है, लेकिन उसकी नियमित देखभाल करना और उसे सुरक्षित रखते हुए वृक्ष बनने तक पोषित करना ही इस पहल का वास्तविक उद्देश्य है।
उन्होंने वन एवं वन्यजीव विभाग के मुख्य वन संरक्षक सौरभ कुमार, आईएफएस, वन संरक्षक अनूप सोनी, भूपिंदर, रोहित कुमार और उनकी पूरी टीम का सहयोग तथा निःशुल्क पौधे उपलब्ध कराने के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विभाग के सहयोग से नागरिकों को अपने प्रियजनों की स्मृति में पर्यावरण संरक्षण के लिए सार्थक योगदान देने का अवसर मिला।
चंडीगढ़ में और स्मृति वन विकसित करने की अपील
ईएसआई ने चंडीगढ़ प्रशासन से अपील की कि शहर और आसपास के क्षेत्रों में अधिक खाली स्थानों की पहचान कर उन्हें स्मृति वन के रूप में विकसित किया जाए। इससे नागरिक अपने दिवंगत माता-पिता, परिवारजनों, रिश्तेदारों और मित्रों की स्मृति में पौधे लगा सकेंगे और उनकी देखभाल भी कर सकेंगे।
सोसायटी के सदस्यों ने इस पहल को वार्षिक परंपरा के रूप में विकसित करने की इच्छा जताई और लगाए गए पौधों की देखभाल करने का संकल्प लिया। उन्होंने नागरिकों से भी अधिक से अधिक पौधे लगाने, मौजूदा हरित क्षेत्रों को संरक्षित करने और पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
झिंगन ने भावुक संदेश देते हुए कहा कि जब कोई प्रियजन संसार से विदा होता है, तो उसकी यादें हृदय में हमेशा जीवित रहती हैं। उसकी स्मृति में लगाया गया वृक्ष उन यादों को धरती में जड़ें जमाने और आने वाली पीढ़ियों तक जीवन का संदेश पहुंचाने का अवसर देता है। उन्होंने कहा कि आइए, पौधे लगाकर अपनी स्मृतियों को हरित, अपने दुःख को सार्थक और अपने प्रेम को अमर बनाएं।
सोसायटी ने स्पष्ट किया कि स्मृति में पौधारोपण केवल श्राद्ध पक्ष तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि किसी भी अवसर पर दिवंगत प्रियजनों को श्रद्धांजलि देने के लिए इसे अपनाया जा सकता है। इस पहल से हरित क्षेत्र बढ़ाने, जैव विविधता को प्रोत्साहित करने और समाज में वृक्षों के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

You may also like

Leave a Comment