Chandigarh अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में चयनित हुई शॉर्ट फिल्म ‘गॉड्स डू नॉट फॉलो’, मनीषा ने चमकाया नाम by Gurdeep Singh October 5, 2026 written by Gurdeep Singh October 5, 2026 4FacebookTwitterPinterestEmail इशान पेहल निर्देशित शॉर्ट फिल्म ‘गॉड्स डू नॉट फॉलो’ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई है। फिल्म को अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में चयनित किया गया है और अब इसकी चर्चा विदेशी मीडिया में भी हो रही है। द डेली प्लैनेट में प्रकाशित समीक्षा में फिल्म की कहानी, कलाकारों के अभिनय और खूबसूरत सिनेमैटोग्राफी की विशेष सराहना की गई है। फिल्म 16 वर्षीय उमा की कहानी है, जो पहाड़ों में बसे एक गांव में रहती है और पिता की मृत्यु के बाद भावनात्मक संघर्ष से गुजर रही है। गांव का वार्षिक मेला उसके लिए उम्मीद लेकर आता है, लेकिन मासिक धर्म के कारण वहां की सामाजिक परंपराएं उसे मेले में जाने से रोकती हैं। समीक्षा के अनुसार, फिल्म इसी छोटे-से प्रतिबंध के माध्यम से परंपरा, सामाजिक नियमों और व्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच के तनाव को सामने लाती है। उमा का विरोध किसी बड़े विद्रोह के रूप में नहीं, बल्कि छोटे-छोटे निर्णयों के जरिए सामने आता है। समीक्षा में फिल्म को स्वयं को खोजने और अपनी पहचान वापस पाने की एक संवेदनशील एवं सार्वभौमिक कहानी बताया गया है। समीक्षक ने फिल्म की खूबसूरत सिनेमैटोग्राफी और अभिनय की प्रशंसा करते हुए लिखा कि फिल्म में पहाड़ केवल पृष्ठभूमि नहीं हैं, बल्कि कहानी की पहचान का हिस्सा बन जाते हैं। निर्देशक इशान पेहल के निर्देशन को भी सराहा गया है। समीक्षा के अनुसार, फिल्म अपने संदेश को थोपती नहीं, बल्कि दर्शक को उमा की दुनिया में ले जाकर स्वयं सोचने का अवसर देती है। 17 वर्ष की उम्र में शुरू हुआ सफर फिल्म से जुड़ी मनीषा ने अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि जब वह 17 वर्ष की थीं, तब एक परिचित सर की सलाह पर उन्होंने मज़ाक-मज़ाक में कास्टिंग के लिए अपनी प्रोफाइल भेजी थी। उन्हें उम्मीद नहीं थी कि चयन हो जाएगा, लेकिन कुछ समय बाद उन्हें 10 दिनों की शूटिंग के लिए बुलाया गया। घर से 10 दिन दूर रहना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। परिवार को मनाने के बाद उनका छोटा भाई गार्जियन के रूप में उनके साथ गया और सेट पर क्रू की मदद भी करता रहा। मनीषा बताती हैं कि शूटिंग के दौरान उनके मन में लगातार यह डर रहता था कि वह कैमरे के सामने ठीक से अभिनय कर पाएंगी या नहीं। लगातार शूटिंग, घर से दूरी और अनियमित खान-पान के कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां भी हुईं। इसके बावजूद उन 10 दिनों ने उन्हें अभिनय के साथ-साथ जीवन में भी आत्मविश्वास और मजबूती दी। आज कोलकाता, चंडीगढ़ और अन्य स्थानों पर फिल्म की स्क्रीनिंग तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रही पहचान को देखकर मनीषा उस शुरुआती अनुभव को याद करती हैं। वह इस अवसर के लिए चार चव्वनी फिल्म्स की आभारी हैं और कहती हैं कि टीम ने उन पर विश्वास किया, जिसने उनके इस सफर को एक यादगार अनुभव बना दिया। 0 comments 0 FacebookTwitterPinterestEmail Gurdeep Singh previous post अधिकारियों को कई बार दी जानकारी, फिर भी कार्रवाई का इंतजार; स्थानीय लोगों में बढ़ी नाराज़गी next post नमन बुजुर्गों को : चण्डीगढ़ में अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की भव्य धूम, पीढ़ियों के मिलन से महका समारोह You may also like हवन-यज्ञ और कृष्ण-सुदामा प्रसंग के साथ श्रीमद्भागवत कथा... October 5, 2026 एससी, एसटी व ओबीसी प्रमाण-पत्रों की प्रक्रिया सरल... October 5, 2026 निवेशक जागरूकता और सेबी की भूमिका” पर सेमिनार... October 5, 2026 गांधी जयंती के उपलक्ष्य में एनएसएस इकाई द्वारा... October 5, 2026 धी जयंती पर ‘बापू का संदेश–हमारा संकल्प’ नुक्कड़... October 5, 2026 साहित्य, गीत और जीवन-दर्शन से सजी सीएससीए की... October 5, 2026 हनुमान चालीसा के पाठ से मिली शक्ति, 174... October 5, 2026 4 अक्टूबर को सजेगी संतों की महफ़िल, 10वें... October 5, 2026 नमन बुजुर्गों को : चण्डीगढ़ में अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन... October 5, 2026 अधिकारियों को कई बार दी जानकारी, फिर भी... October 5, 2026 Leave a Comment Cancel Reply Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.